वृन्दा विपिन रेणु कण कण`

वृन्दा-विपिन रेणु कण-कण, रोता तुझे श्याम आ,
विनती करे, ब्रज पइयाँ पड़े, वृन्दावन छोड़ के ना जा,

तूँ कहाँ जा रहा, छोड़ के ब्रज बता,
तूँ कहाँ जा रहा, छोड़ के ब्रज बता, ये तो बताना ही होगा,
रोये श्यामा तेरी, ओ निठुर-निर्दयी,
रोये श्यामा तेरी, ओ निठुर-निर्दयी,
रूठी राधा, मनाना-ही होगा, रूठी राधा, मनाना-ही होगा,
रोती है माँ, रोते बाबा, बेदर्द श्याम क्यूँ बना,
विनती करे, ब्रज पइयाँ पड़े, वृन्दावन छोड़ के ना जा,
वृन्दावन छोड़ के ना जा....

सूनी ब्रज की गलीं, सूना यमुना का तट,
सूनी कदम की छैयाँ,
सूनी ब्रज की गलीं, सूना यमुना का तट,
सूनी कदम की छैयाँ,
तूँ चला जायेगा, छोड़ ब्रज साँवरे,
तूँ चला जायेगा, छोड़ ब्रज साँवरे,
कौन थामेगा राधा की बैयाँ, कौन थामेगा राधा की बैयाँ,
ओ मनहरण श्यामसुन्दर, ओ मनहरण श्यामसुन्दर,
ब्रज-वासियों के सखा,
विनती करे, ब्रज पइयाँ पड़े, वृन्दावन छोड़ के ना जा,
वृन्दा-विपिन रेणु कण-कण, रोता तुझे श्याम आ,

विनती करे, ब्रज पइयाँ पड़े, वृन्दावन छोड़ के ना जा,
वृन्दावन छोड़ के ना जा, वृन्दावन छोड़ के ना जा,

वृन्दावन छोड़ के ना जा, वृन्दावन छोड़ के ना जा,

!!! गीत रचना-अशोक कुमार खरे !!!
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