छवि तेरी प्यारी है मेरे बाँके बिहारी

छबि तेरी प्यारी है, मेरे बाँके बिहारी,

(तर्ज़: आने से उसके आये बहार)

हो गया मुझको कान्हा से प्यार,
मोहनी सुरतिया लीला अपार,
छबि तेरी प्यारी है मेरे बाँके बिहारी ,
त्रिभुवन में न्यारी है मेरे बाँके बिहारी,

काली घटा सी छाये, तेरे गालों पे घुघराली अलकें,
मन्द मन्द मुस्काये ,यह जादू भरी दोनों पलकें,
जीने की इक आस तुम्ही,
अब खुद को तुझपे वारी है, मेरे बाँके बिहारी,
छबि तेरी प्यारी है मेरे बाँके बिहारी,

तेरे सिवा इस जग से, कान्हा और ना कुछ अब चाहूँ,
टूटी फूटी बाणी से, बस गीत तेरे ही गाउँ,
चरणों में शरण दे दो,
तू बड़ा ही लीला धारी है मेरे बाँके बिहारी,
छबि तेरी प्यारी है मेरे बाँके बिहारी,

तेरी मोहिनी मुरतिया, कान्हा दिल में मैं कैसे बैठाउँ,
पाऊँ हर घड़ी तेरा दरसन , यह भाव मैं कैसे जगाऊँ,
भक्ति का मुझे ज्ञान नहीं,
दास दरस का  भिखारी है मेरे बाँके बिहारी,
छबि तेरी प्यारी है मेरे बाँके बिहारी,
त्रिभुवन में न्यारी है मेरे बाँके बिहारी,

आभार: ज्योति नारायण पाठक
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