सुख दुःख तेरे हाथ संवारे तेरी मर्जी चलती है

सुख दुःख तेरे हाथ संवारे तेरी मर्जी चलती है,
सबको है मालुम ये दुनिया तेरे भरोसे पलती है,
सुख दुःख तेरे हाथ संवारे तेरी मर्जी चलती है,


जिसको मिलतीरहमत तेरी वो प्राणी इत्रराता है,
बिन बोले ही शरणागत को मुह माँगा मिल जाता है,
तेरे सवाले ही सांवरिया मेरी गरस्ती चलती है,
सुख दुःख तेरे हाथ संवारे तेरी मर्जी चलती है

तेरे प्रेम पे हे दीप जले है रोज दिवाली मनाते है,
तुझसा मालिक पा के हम तो फुले नही समाते है,
घर आंगन में तेरे नाम की जोत सदा जग ती है,
सुख दुःख तेरे हाथ संवारे तेरी मर्जी चलती है,

चाँद सितारे फूल नज़ारे तेरे दम पर हस्ते है,
चारो धाम के सुख भी सारे तेरी चरण में बस ते है,
खुशियों की लहराती नदिया तेरे चरण से निकलती है,
सुख दुःख तेरे हाथ संवारे तेरी मर्जी चलती है,

ओ सांवरियां हम भोले है भूल हमारी विसराना,
अगर हम कही भटक रहे तो कान पकड़ के सम्जाना,
चोखानी की आँखों में तेरी सावल शवि मचलती है,
सुख दुःख तेरे हाथ संवारे तेरी मर्जी चलती है
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