भेष बदल कै कृष्ण आग्या

नहा धोके मै बैठी भगतनी भजे राम की माला,
भेष बदल कै कृष्ण आग्या बणके मांगन आला....

चिमटा ठा कै भाजी भगतनी ठहर जा मांगन आला,
मेरी भक्ति में भंग गेर दिया मै फेरु थी माला,
रे रहन दे भगतनी जान दे भगतनी झूठी फेरे माला,
उपरले तै राम रटे है तेरे भितरले में काला.....

राम रटया ध्रुव भगत नै उम्र का था वो याना,
अरे धजा चढ़ी आकाश में दुनिया में होया उजाला,
रे रहन दे भगतनी जान दे भगतनी झूठी फेरे माला,
उपरले तै राम रटे है तेरे भितरले में काला.....
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