सलोने सांवरे मोहन

सलोने सांवरे मोहन तुम्हे मन याद करता है,
चले आ जहा हो तुमें मिलने को मन तरस ता है,

कभी हम साथ खेले थे यही यमुना किनारे में
कभी झूले थे संग तेरे वो सावन के फुहारों में,
व्ही सावन वही झूले ये मदुवन याद करता है,
सलोने सांवरे मोहन.........


मेरा मन चैन छीना है तेरी मुरली की तानो ने,
बहुत डूंडा मिले न तुम मिलन के हर ठिकानो में,
वही पनघट वही राहे ये कदम याद करता है,
सलोने सांवरे मोहन.......................

इन्दर  बरसा था बन बादल बचाया सबको था तुमने,
मेरे वर से जो ये नैना तरस न खाया क्यों तुमने,
मेरे आंसू मेरी धड़कन ये दिल फरयाद करता है,
सलोने सांवरे मोहन..............

सुनके बीनती ये रजनी की रोशन चाँद सितारे है,
तेरे बिन श्याम मधुमन के फीके ये नज़ारे है,
सुना है मन का आंगन भी निरंजन याद करता है,
सलोने सांवरे मोहन.......
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