रंगरेज का धर के भेष

रंगरेज का धर के भेष, मोहे से मिलन तू प्रेम के देस,
आज मोरे सांवरिया, रंग दे मोरी चुनरिया,
अपने ही तू रंग में कान्हा, अपने ही तू रंग में कान्हा,
रंग दे मोरी चुनरिया,
आजा मोरे सांवरिया, रंग दे मोरी चुनरिया,
आजा मोरे सांवरिया.....

लाल गुलाबी, नीली पीली,
मुझको इक भी ना भाए,
प्रीत का गूढ़ा रंग चढ़ा,
जो फीका हो ना पाए,
मोरे मन में श्याम सलोने, बस गई तोरी सुरतिया,
आजा मोरे सांवरिया रंग दे मोरी चुनरिया,
आजा मोरे सांवरिया रंग दे कोरी चुनरिया.....

जैसे रंग दी थी मीरा की, वैसी ही तू रंग मेरी,
ओढ़ जिसे छम छम नाचूं मैं, ना कर गिरधर अब देरी,
कान्हा कान्हा रटते रटते, बीते सारी उमरिया,
आजा मोरे सांवरिया, रंग दे मोरी चुनरिया,
आजा मोरे सांवरीया, रंग दे कोरी चुनरिया......

ऐसी तुझसे लगन है लागी, जिया ना तुम बिन जाए,
कीर्ति भी हो गई दिवानी, तेरे ही गुण गाए,
राहों में पलके है बिछाई, कब आओगे मोरी डगरिया,
आजा मोरे सांवरिया, रंग दे मोरी चुनरिया,
आजा मोरे सांवरिया, रंग दे कोरी चुनरिया......
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