ढल गई सारी उमरिया सफ़ेद बाल हो गये

ढल गई सारी उमरिया सफ़ेद बाल हो गये,
खो गई मुखड़े की शोभा बुरे हाल हो गये.....

तूने नहीं माना गुरु का समझाना,
की फिरता रहा मस्ताना,
मोह माया में तू रहा लिपटाना,
जग में आके हुआ जग का दीवाना,
फ़सके बिषयों में तेरे ये क्या हाल हो गये,
खो गई मुखड़े की शोभा बुरे हाल हो गये.....

दान किया न तूने पूण्य कमाया,
न ही राम के गुण तूने गाया,
न ही तीरथ वरत किये कुछ तूने,
न ही मंदिर गया प्रभु के पद छूने,
पूजा अर्चना बिना तेरे की साल खो गये,
खो गई मुखड़े की शोभा बुरे हाल हो गये......

अब भी गाले प्रभु गुण प्यारे,
ना व्यर्थ समय गवां रे,
करदे करदे हरि को सब कुछ अर्पण,
तन मन धन और ये अपना सारा जीवन,
राजेन्द्र हरि ये छन जी का जंजाल हो गये,
खो गई मुखड़े की शोभा बुरे हाल हो गये.....

गीतकार/गायक-राजेन्द्र प्रसाद सोनी
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