ओ सांवरे पलना झुलवाऊंगा

अब के सावन श्याम प्रभु झूला बंधवाऊंगा,
ओ सांवरे पलना झुलवाऊंगा....
               
रेशम की डोर से बंधा है श्याम पलना,
चंदन के पलना मैं झूले श्याम ललना,
मखमल की चादर और तकिया बनवाऊंगा,                  
अरे ओ सावरे पलना झुलवाऊँगा.....
 
हाथो से अपने श्याम तुमको सजाऊंगा,
केशरिया बागा सर पर मुकुट सजाऊंगा,
केशर चंदन का बाबा में इत्र लगाडूंगा,  
अरे ओ सावरे पलना झुलवाऊँगा.....

सुंदर से नैनो में काजल तुम्हे लगादूँगा,
नजर न लागे काला टीका तुम्हे लगादूँगा,
राई और लून से सवारा नित नजर उतारूंगा,
अरे ओ सावरे पलना झुलवाऊँगा.....

मोरवी का लालन तू तो बड़ा ही कमाल है,
भगतो का रखवाला बाबा प्रतिपाल है,
अंकित गुरु ये बोले तेरा गुण गाऊंगा,
अरे ओ सावरे पलना झुलवाऊँगा.....
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