तुम्हारी बंसी बजी जो कान्हा

तुम्हारी बंसी, बजी जो कान्हा, हमें तुम्हारे, समीप लाई ll
*नहीं है वश में, ये मन हमारा ll, ना जाने कैसी, लग्न लगाई,,,

तुम्हीं को हमने, है अपना माना*, जो चाहे समझे, हमें जमाना ll
ना और भाए, सिवा तुम्हारे ll, नीरस लगे है, ये दुनिया सारी,,,
तुम्हारी बंसी, बजी जो कान्हा, हमें तुम्हारे,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

झूठा है बंधन, जगत का मोहन*, तुम्हीं से सच्चा, नाता हमारा ll
शरण ते ले लो, चरण ये दे दो ll, इनके लिए हम, सब छोड़ आई,,,
तुम्हारी बंसी, बजी जो कान्हा, हमें तुम्हारे,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

तुम्ही हो माता, पिता तुम्ही हो*, तुम्ही हो बंधु, सखा तुम्ही हो ll
तुम्ही हो जीवन, प्राण हमारे ll, तुम्हीं से चलती, सांसे हमारी,,,
तुम्हारी बंसी, बजी जो कान्हा, हमें तुम्हारे,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

अपलोडर- अनिलरामूर्तिभोपाल

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