ज्ञान मोहे दीजो हे काली

तेरा भगत करे अरदास, ज्ञान मोहे दीजो हे काली....

माली कै नै बाग लगायो, पर्वत हरियाली,
रे हाथ ने पुष्पन की माला, द्वार खड्या माली,
तेरा भगत करे अरदास, ज्ञान मोहे दीजो हे काली....

जरी का दुपट्टा चीर शीश पर सोहे जंगाली,
तेरै नाकन में नकबेसर सोहे कर्ण फूल बाली,
तेरा भगत करे अरदास, ज्ञान मोहे दीजो हे काली....

सवा पहर के बीच भवन में खप्पर भर वाली,
कर दुष्टन का नास भगत की करना रखवाली,
तेरा भगत करे अरदास, ज्ञान मोहे दीजो हे काली....

चाबत नगर पान होठ पर छाय रही लाली,
तनै गावे मोतीलाल कालका कलकत्ते वाली,
तेरा भगत करे अरदास, ज्ञान मोहे दीजो हे काली....
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