मेला फागण दा खाटू चल भगतां

हो मेला फागन दा,
औंदा है हर साल,
हो खाटू चल भगता, ले के रंग गुलाल,
ओ होली खेलांगे,
श्यामधनी दे नाल,
मेला फागन दा॥

फागण महीने विच लगेया है मेला,
लोकी भज-भज खाटू चले औंदे,
भगता दी टोली खेलें बाबे संग होली,
रंग श्याम नु सारे लगौंदे,
चंग और ढोल बाजे,वेखो सारे झूमे नाचे,
करदेने मिलके धमाल,
हो मेला फागन दा,
औंदा है हर साल,
हो खाटू चल भगता,ले के रंग गुलाल,
मेला फागन दा॥

तीन बाण धारी मेरा श्याम बिहारी,
वेखो किन्ना सोणा खाटूवाला लगदा,
किन्नी सोणी लागे तेरी लीले दी सवारी,
बाबा सूवे-सूवे चोले विच जचदा,
दर तेरे आके तेरे दर्शन पाके सारे,
खुशियांच होंदे निहाल,
हो मेला फागन दा,
औंदा है हर साल,
हो खाटू चल भगता,ले के रंग गुलाल,
मेला फागन दा॥

सारी-सारी रातें ऐथे होंदे जगराते,
नाल मिल सारे भेंटे है गौंदे,
सारे पासे लगदेने श्याम दे जयकारे,
सारे रल-मिल भंगड़े है पौंदे,
बल्ले-बल्ले होगी सारे मेले विच वेखो,
मेरे सांवरे ने कित्ता है कमाल,
हो मेला फागन दा,
औंदा है हर साल,
हो खाटू चल भगता,ले के रंग गुलाल,
ओ होली खेलांगे,
श्यामधनी दे नाल,
मेला फागन दा......
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