बड़ी दूर से दोड्यो आया बाबा जी थारे कारन

बड़ी दूर से दोड्यो आया बाबा जी थारे कारन,
बड़ी दूर से दोड्यो आयो श्याम धनी थारे कारन,
दर्शन बिन पाच्छे नहीं जाऊ ऊबू थारे बारन....

आंख्या में आन्सुडा चाले बहे नीर की धार जी
तालो देकर कईया सोयो खोलो न किवाड़ जी
भागता माहि लाज गवाई श्याम धनी तेरे बारन,
दर्शन बिन पाच्छे नहीं जाऊ ऊबू थारे बारन.....

सेवक माहरो कहो ना माने चाबी नहीं बतावे जी,
वे काई जाने महरी पीड न क्यू न दर्श दिखावे जी,
या तो दर्श दिखा देदे बाबा नहीं बैठा सु थारे बारन,
दर्शन बिन पाच्छे नहीं जाऊ ऊबू थारे बारन....

अर्ज सुनी जब श्याम धनी न भगता ज्योत जगाई है,
मोर छड़ी की जी ताले पे श्याम दि सक्लाई है,
खुल गया दरबार श्याम धनी का भगती के बस कारन,
दर्शन बिन पाच्छे नहीं जाऊ ऊबू थारे बारन....

श्याम बहादुर भगत श्याम का हंस-हंस हुकुम सुनावे है,
मंदिर माहि नाचन लाग्यो श्याम के पुष्प चडावे है,
आलू सिंह ये भजन सुनावे श्याम धनी थारे बारन,
दर्शन बिन पाच्छे नहीं जाऊ ऊबू थारे बारन....
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