दो घड़ी प्रेम से हरी का सुमिरन करो

पाप तो जिंदगी भर कमाते रहे,
और भी कुछ करो जिंदगी के लिए,
हाथ हिंसा की खातिर उठाए सदा,
जोड़ लो अब इन्हें बंदगी के लिए॥

दो घड़ी प्रेम से हरी का सुमिरन करो,
ध्यान हरि के चरणों में लगाया करो,
लाख जन्मों के बंधन से छूट जाओगे,
और क्या चाहिए जिंदगी के लिए,
पाप तो जिंदगी भर कमाते रहे......

जिंदगी सौ बरस की तुम्हें मिल सके,
तो जिओ दीन दुखियों के संसार में,
जान देने का मौका अगर आ पड़े,
कर दो कुर्बान बस आदमी के लिए,
पाप तो जिंदगी भर कमाते रहे......

सच्चा साथी नहीं कोई संसार में,
बस प्रभु का सहारा है मझधार में,
सबकी बिगड़ी यहां पर बनी ही नहीं,
जाओ प्रभु की शरण दो घड़ी के लिए,
पाप तो जिंदगी भर कमाते रहे......
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