मैं सब देवा ने छोड़

मैं सब देवा ने छोड़ रामसा ने ध्यावा,
म्हारे मनड़े री वीणा पर थारा गुण गावा,
मैं सब देवा ने छोड़ रामसा ने ध्यावा॥

ना जाहूँ में काशी मथुरा ना कोई तीर्थ धाम,
रोम रोम में रम गियो म्हारे रामदेव रो नाम,
मैं तो सारे जग ने छोड़ थारे शरणे आया,
मैं सब देवा ने छोड़ रामसा ने ध्यावा॥

भक्ता पर जब भीड़ पड़े तब थे ही लाज बचाओ,
आँधालिया पांगलिया री प्रभु थे ही आन निभावो,
मैं तो गावा घर घर गीत ध्वजा थारी फहरावा,
मैं सब देवा ने छोड़ रामसा ने ध्यावा॥

ना कोई ऊंचो ना कोई निचो ना कोई छुआ छूत,
भेद भाव सब बाता झूठी सच्ची मानव जात,
म्हारे मन उपजाओ ज्ञान प्रभु में तर जावा,
मैं सब देवा ने छोड़ रामसा ने ध्यावा॥

मैं सब देवा ने छोड़ रामसा ने ध्यावा,
म्हारे मनड़े री वीणा पर थारा गुण गावा,
मैं सब देवा ने छोड़ रामसा ने ध्यावा॥
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