सतगुरु आवो हमरे देस

सतगुरु आवो हमरे देस,
निहारूँ वाट खड़ी,
निहारूँ वाट खड़ी।

वाहे देस की बत्तियाँ रे,
लावें संत सुजान,
लावें संत सुजान,
उन संतन के चरण पखारूं,
तन मन करूँ कुर्बान,
तन मन करूँ कुर्बान,
सतगुरु आवो हमरे देस,
निहारूँ वाट खड़ी,
निहारूँ वाट खड़ी।

वाहे देस की बत्तियाँ हम से,
सतगुर आन कही,
सतगुर आन कही,
आठ पहर के निरखत हमरै,
नैन की नींद गयी,
नैन की नींद गयी,
सतगुरु आवो हमरे देस,
निहारूँ वाट खड़ी,
निहारूँ वाट खड़ी।

भूल गयी तन मन धन सारा
व्याकुल भया सरीर,
व्याकुल भया सरीर,
बिरहै पुकारे विरहणी,
ढरकत नैनन नीर,
ढरकत नैनन नीर,
सतगुरु आवो हमरे देस,
निहारूँ वाट खड़ी,
निहारूँ वाट खड़ी।

धर्मदास के दाता सतगुरु,
पल में कियो निहाल,
पल में कियो निहाल,
आवागवन की डोरी कट गयी,
मिटै भ्रम जंजाल,
मिटै भ्रम जंजाल,
सतगुरु आवो हमरे देस,
निहारूँ वाट खड़ी,
निहारूँ वाट खड़ी....
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