तुम बिना मोरी कौन खबर ले

तुम बिना मोरी, कौन खबर ले,
गोवर्धन गिरधारी रे ll
*तुम बिना मोरी, कौन खबर ले l
गोवर्धन गिरधारी रे,,,
तुम बिना मोरी, कौन खबर ले,
गोवर्धन गिरधारी रे ll

औरन को तो, और भरोसो* ll
हमको तो आस तुम्हारी रे,,,
तुम बिना मोरी,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

मोर मुकुट सिर, छत्र विराजे* ll
कुण्डल की छवि न्यारी रे,,,
तुम बिना मोरी,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

लटपट पाग, केसरिया जामा* ll
हिवड़े ओ हार हज़ारी रे,,,
हरि बिना मोरी,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

यमुना के तीर, धेनु चरावे* ll
बँसी वजावे, छत्र धारी रे,,,  
तुम बिना मोरी,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

वृन्दावन में, रास रचो है* ll
गोपियों में गिरवर धारी रे,,,
हरि बिना मोरी,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

छप्पन भोग, छतीसों मेवा* ll  
भोग लगावे राधे प्यारी रे,,,
तुम बिना मोरी,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

वृंदावन की, कुंज गली में* ll
सोहत राधे प्यारी रे,,,
तुम बिना मोरी,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

इंद्र कोप, कियो बृज ऊपर* ll
नख पर गिरवर धारी रे,,,
तुम बिना मोरी,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

सूरदास प्रभु, तिहारे मिलन को* ll
चरण कमल बलिहारी रे,,,
तुम बिना मोरी,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

अपलोडर – अनिलरामूर्तिभोपाल
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