वाणी से हरदम यही गीत गाऊं

श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी,
हे नाथ नारायण वासुदेवा,
हे नाथ नारायण वासुदेवा,
हे नाथ नारायण वासुदेवा......

हाथों से संतों की सेवा कराऊ,
पैरों से चलकर मैं वृंदावन जाऊं,
वाणी से हरदम यही गीत गाऊं,
हे नाथ नारायण वासुदेवा.......

गीता पढ़ु और गीता सुनु मैं,
गीता की चर्चा घर-घर करूं मैं,
गीता हमारी है वेद माता,
हे नाथ नारायण वासुदेवा......

गंगा किनारे मैं कुटिया बनाऊं,
गंगा नहाऊं और गंगाजल पियू,
गंगा किनारे मैं दीपक जलाऊ,
हे नाथ नारायण वासुदेवा.......

मधुबन में जाके मैं धूनी रमाऊ,
करके तपस्या मैं तन को समारू,
वाणी से हरदम यही गुनगुनाऊ,
हे नाथ नारायण वासुदेवा.......

सखियों को साथ ले मंदिर में जाऊं,
मंदिर में जाके हरि गुण गांऊ,
हरि गुण गाके मैं जीवन समारू,
हे नाथ नारायण वासुदेवा......
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