गोकुल की धरती

जय राधे कृष्ण..... जय राधे कृष्ण.....

वंदन ये है गोकुल की धरती का हर इक इक कण
जहां कृष्ण ने राधा के संग रखे थे अपने चरण। -2
जय राधे कृष्ण..... जय राधे कृष्ण.........


सो तीर्थ करनी से ज्यादा, फल है यहां पर मिलते,
युमना तट पर राधा के संग, श्याम जहां थे मिलते।
कृष्ण चरण में राधेहिय ने किया था प्रेम समर्पण,
जहां कृष्ण ने राधा के संग रखे थे अपने चरण।
जय राधे कृष्ण..... जय राधे कृष्ण.........


पिछले जन्म के पुण्य हो सब, उस जगह के दर्शन पाके,
गोपियो के संग मोहन राधा, जहां थे रास रचाते।
उस धरा रखते ही मस्तक हो जाता है भव से तरन,
जहां कृष्ण ने राधा के संग रखे थे अपने चरण।
जय राधे कृष्ण..... जय राधे कृष्ण.........


बड़े ही पावन मन भावन है, नन्द का बरसाना,
जहां पे गोपी ग्वालन के संग, होली खेली राधा कान्हा।
स्वर्ग के सुख भी छोटे लगते कर के वहां विचरण,
जहां कृष्ण ने राधा के संग रखे थे अपने चरण।
जय राधे कृष्ण..... जय राधे कृष्ण.........

वंदन ये है गोकुल की धरती का हर इक इक कण
जहां कृष्ण ने राधा के संग रखे थे अपने चरण......
जय राधे कृष्ण..... जय राधे कृष्ण.........
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