जीवन यूँ ही बीत न जाए

जीवन यूँ ही बीत न जाए

जग में पशु भी खा के सोते
स्वार्थ पूर्ति में स-कुशल होते
वो मानव क्या भोग सुखों में
जीवन व्यर्थ गवाएँ जीवन
यूँ ही बीत न जाए रे जीवन

देखो सावधान अब रहना
जो कुछ दुःख आये सो सहना
धैर्य पूर्वक सह लेना ही
मन का तप कहलाए जीवन
यूँ ही बीत न जाए रे जीवन

कभी किसी को कष्ट न देकर
हितप्रद सेवा का व्रत लेकर
निज कर्तव्य निभाते रहना
पर अभिमान न आए जीवन
यूँ ही बीत न जाए रे जीवन

कभी न अपना लक्ष भुलाना
अपने को निष्काम बनाना
जो भी कामना युक्त हृदय है
प्रेम नहीं कर पाए जीवन
यूँ ही बीत न जाए रे जीवन

तन से श्रम मन से संयम हो
बुद्धि विवेकी उर उपशम हो
पथिक यही सुन्दर जीवन है
जो प्रभु के मन भाए जीवन
यूँ ही बीत न जाए  रे जीवन
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