भावना की ज्योत

भावना में भाव ना हो तो भावना बेकार है
और भावना में भाव हो तो भव से बेडा पार है

भावना की ज्योति को जगा के देखिये
बोलती है मूर्ती बुलाके देखिये
सौ बार चाहे आज़मके देखिये
बोलती है मूर्ती बुलाके देखिये

करोगे जो सवाल तो जवाब मिलेगा
यहाँ पुण्य और पाप का हिसाब मिलेगा
भले बुरे सबको पहचानते हैं वो
तेरी खरी खोटी जानते हैं वो
श्रद्धा से सर को झुका के देखिये
बोलती है मूर्ती बुलाके देखिये

मेरे श्याम मेरे श्याम मेरे सांवरिया.............

छाया में है छुपे बाबा बैठे धुप में
मिलता है श्याम का दर्शन किसी भी रूप में
तेरी हर सांस में निवास इनका
होगा हर जगह पे एहसास इनका
जिस और नज़रें घुमा के देखिये
बोलती है मूर्ती बुलाके देखिये
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