ग्यारस चानन की आई

ग्यारस चानन की आई भगता मिल ज्योत जगाई,
चंग मंजीरा बाजे आंगने,
मन में हरयाली छाई भगता मिल ज्योत जगाई,
चंग मंजीरा बाजे आंगने

चम चम चमकातो मुखड़ो काना में कुंडल हो,
हिवड़ो हरछाओ हो भला पधारेया
हीरो भर के माथे में अंतर दमके बागे में
फुल्डा बरसे छे माहरे आंगने,
ग्यारस चानन की आई भगता मिल ज्योत जगाई,

गंगा जल ध्यारी कारा चरण पखारा हो
उची शिंगासन बैठो आरती उतारा हो
भजन सुनावा थाणे गा के रिजावा थाणे अमृत बरसे छे माहरे आंगने
ग्यारस चानन की आई भगता मिल ज्योत जगाई,

जो थाणे भावे बाबा भोग लगावा हो
रुच रुच जीवो प्रभु जी परदों लगावा हो,
थारो मुलका तो मुखड़ो चंदा सु लागे उजडो कीर्तन में देखा थाणे आंगने
ग्यारस चानन की आई भगता मिल ज्योत जगाई,

लगन निभा जो प्रभु जी प्रेम बड़ा जो,
या म्हारे मिनका जोड़ी सफल बना जो
रेहा चरना का चाकर भजन सुना छा गा कर पल भर पधारा माहरे आंगने,
ग्यारस चानन की आई भगता मिल ज्योत जगाई,
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