शिर्डी जाने वाली हवा इक पल रुक न जरा

शिर्डी जाने वाली हवा इक पल रुक न जरा
हाल मेरा मेरे साईं से केहना होगा ये एहसान तेरा
शिर्डी जाने वाली हवा इक पल रुक न जरा
साईं के दर पे जाना तू मेरा हाल सुनाना तू,

बंध कर मैं ये दुनिया दारी,
जाना पाऊ है लाचारी,
मैं हु याहा साईं वाहा दर्शन का अरमान मेरा
शिर्डी जाने वाली हवा इक पल रुक न जरा

कौन है अपना कौन बैगाना
उनके सिवा कुछ और न जाना
कोई नही है जो कही होता हो मेहरबान मेरा
शिर्डी जाने वाली हवा इक पल रुक न जरा

उनके बंदे उनकी अमानत सुनते है रहते है सदा वो सलामत ,
मेरी दुआ का क्या हुआ कुंदन है परेशान तेरा
शिर्डी जाने वाली हवा इक पल रुक न जरा
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