अरे खोल तेरे भंडारे बाबा मांगन आई मैं

बिन पैसे के दुनिया में कोई पूछे जात नही
अरे बिन पैसे के दुनिया में आज बनती बात नही,
क्यों कर घर का खरचा चाले इस महंगाई में
अरे खोल तेरे भंडारे बाबा मांगन आई मैं

पानी भी न मुफ्त मिले यो लगेया विकन बाबा
आगे क्या होगा सोचु तो लगे डरन बाबा
पूरा को न पड़ता इन सारेया की कमाई में
अरे खोल तेरे भंडारे बाबा मांगन आई मैं

महंगाई की मार कसुती दुनिया पे पड़ गी
अरे बड़े बड़े सेठा की लाली चेहरे की झड़ गी,
इक तू ही उजाला दिखे इस गेहरी खाई में
अरे खोल तेरे भंडारे बाबा मांगन आई मैं

पैसा हो पल्ले तो दुनिया करे गुलामी से
जिसके छोरे जितना  पैसा उतना नामी से,
इब को न आवे नरसी दुनिया की बेह्काई में
अरे खोल तेरे भंडारे बाबा मांगन आई मैं
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