अंधेरो में बन के जो आया उजाला

अंधेरो में बन के जो आया उजाला,
वो है खाटू वाला वो है खाटू वाला

भटकता रहा मैं मिला न ठिकाना
हालत पे मेरी हस्ता जमाना
दर दर भटकते को जिसने सम्भाला,
वो है खाटू वाला

बेबस बड़ा हु जिद पे अडा हु
दीनो के दाता तेरे दर पे खड़ा हु
जिस के भरोसे सोंपा जीवन ये सारा,
वो है खाटू वाला

नजर हुई तेरी रोशनी मिली है
उमीदो की फिर से कलियाँ खिली है
जिसकी दया से मेहके गुलशन हमारा
वो है खाटू वाला

नही कोई मुझको किसी से शिकायत
मुझपे है मेरे श्याम की इनायत
अभीशेक निर्मल को जिस ने सवारा,
वो है खाटू वाला