आतो सुरगां न सरमावे

आतो सुरगां न सरमावे , इ पर देव रमण न आवे
ईरो जश नर नारी गावे , धरती धोरां री,
धोरां री धरती धोरां री॥

सूरज कण कण न चिमकावे ॥
चंदो इमरत रस बरसावे , तारा निछरावल कर जाय्वे , धरती धोरां री
काला बाद्लिया घ्र्रावे ॥, बिरखा घुनघ्रिया घमकावे ,
बिजली डरती ओल्हा खावे ,धरती धोरां री ॥
आतो सुरगां न सरमावे , इ पर देव रमण न आवे
ईरो जश नर नारी गावे , धरती धोरां री
धोरां री धरती धोरां री ॥

लुल लुल बाजरियो लहराव ॥
मक्की झाला देर बुलावे , कुदरत दोंयु हाथ लूँटावे
पंछी मधुरा मधुरा बोले ॥मिश्री मीठे सुर में घोले
झिणु बायारियो पंपोले धरती धोरां री॥
आतो सुरगां न सरमावे , इ पर देव रमण न आवे
ईरो जश नर नारी गावे , धरती धोरां री  
धोरां री धरती धोरां री ॥

ईरो चितोड़ो गढ़ लुन्ठो ॥
ओतो रण वीरा रो खूंटो
ईरो जोधाणु नो कुंटो , धरती धोरां री
आबू आमेरे परवाने ॥ लूणी गंगा जी ही जाणे
उभो जेशलमेर सिराने ,धरती धोरां री॥
आतो सुरगां न सरमावे , इ पर देव रमण न आवे
ईरो जश नर नारी गावे , धरती धोरां री
धोरां री धरती धोरां री ॥

ईरो बिक्कानो गर्विलो ॥
ईरो अलवर जब्बर हठिलो
ईरो अजयमेर भड्किलो धरती धोरां री ॥
जयपुर नगरा री पटरानी ॥ कोटा बूंदी कद अण जाणी
चम्बल कहव आरिं कहानी ,धरती धोरां री॥
आतो सुरगां न सरमावे , इ पर देव रमण न आवे
ईरो जश नर नारी गावे , धरती धोरां री,
धोरां री धरती धोरां री ॥

ई पर तनडो मनडो वारा ॥
ई पर जीवन प्राण उवारा
ई री ध्वजा  उड़े गिग्नारा ,धरती धोरां री
ई न मोत्यां थाल बँधावा ॥
ई री धुल लिलाड लगावा  
ई रो मोटो भाग सरावा धरती धोरां री ॥
आतो सुरगां न सरमावे , इ पर देव रमण न आवे
ईरो जश नर नारी गावे , धरती धोरां री  
धोरां री धरती धोरां री ॥
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