कब से खड़ी हूँ जगदम्बे माँ

कब से खड़ी हूँ तेरे दर पे के झोली मेरी भरदे रे भर दे जगदम्बे माँ
मैया भवर में है नैया तू पार मुझे कर दे कर दे जगदम्बे माँ

कांटो का वन है ये दुनिया सारी,
इक तेरा मंदिर फूलो की क्यारी,
बिगड़ी सभी की तुने सवारी
जानी है तू सब तेरे भिखारी,
जय जय माता जगदम्बे माँ

हो धरती गगन में तेरी ही माया,
माता जो तेरे चरणों में आया,
मांगे बिना सब कुछ उसने पाया
मुझपे कर दे ममता की छाया
जय जय माता जगदम्बे माँ