हाथ पकड़ता सबका और तु सबका साथी हैं

हाथ पकड़ता सबका और तु सबका साथी हैं,
दो हाथ मेरे भी हैं, इनमे क्या खराबी हैं ।

तुम हाथ पकड़ते हो या हाथ देखते हो,
या किसमे फायदा हैं, पहले ये समझते हो ।
या हाथो में अलग अलग कोई खुशब आती हैं,
या हाथो में विधाता ने कोई छाप लगा दी हैं ॥
दो हाथ मेरे भी हैं, इनमे क्या खराबी हैं..

हाथो में नहीं होता, नजरो में फर्क होता,
यह हाथ पकड़कर देख, इनमे भी दर्द होता ।
या हाथो के कर्मो से तुझको नाराजगी हैं,
या हाथो के कर्मो से तुझको नाराजगी हैं ॥
दो हाथ मेरे भी हैं, इनमे क्या खराबी हैं..

बस इतना फर्क होता, ये छोटे-बड़े होते,
हो जाते बराबर जब तेरे आगे जुड़े होते ।
राजा और भिकारी दोनों ही फरियादी हैं,
राजा और भिकारी दोनों ही फरियादी हैं ॥
दो हाथ मेरे भी हैं, इनमे क्या खराबी हैं..
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