पारस हैं तु, मुझे पारस बना (पार्श्वनाथ भगवान)

पारस हैं तु, मुझे पारस बना,
अपने वैभव का वारीस बना ।
समरत हैं तु, कर आशा पुरी,
नश्वरता हर, मुझे शाश्वत बना ॥
पारस हैं तु, मुझे पारस बना..

प्रभु मैं हुं कण तेल का, तु हैं अलौकिक प्रकाश,
तेरी तरफ मैं बढ़ता चला, कर मेरे अंतर्मन में उजास ।
अवगुण मेरे कर दे भस्म तु, दिव्य बना मुझे तेजस बना,
पारस हैं तु, मुझे पारस बना, अपने वैभव का वारीस बना ॥

मैं जड़ हुं, पत्थर हुं मैं, कर्मानुओ से बंधा,
चेतन हैं तु, शुद्ध बुद्ध तु प्रभु, घड़ आत्मा का स्वरूप मेरा ।
शिल्पी बनकर तु तराश मुझे, अपने जैसा जस का तस बना,
पारस हैं तु, मुझे पारस बना, अपने वैभव का वारीस बना ॥

मैं बिंदु, सिंधु हैं तु, तुझमें मिल जाना मुझे,
अपना वजूद मिटाकर के भी, प्रभु तुझमें ही अब समाना मुझे ।
तुझमें मुझमें अंतर ना रहे, ऐसा मेरे लिए मार्ग बना,
पारस हैं तु, मुझे पारस बना, अपने वैभव का वारीस बना ॥

जीर्ण शीर्ण है आत्मा मेरी, कर दो भव्य जीर्णोद्धार,
जीरावला पार्श्व एक तु, भक्तों का तारक, उद्धारक, आधार ।
करुणा नजर मुझपे करदे प्रभु, मेरे लिए दिल में अमिरस बना,
पारस हैं तु, मुझे पारस बना, अपने वैभव का वारीस बना ॥
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