मनमोहन मेरे

तर्ज़:महबूब मेरे,महबूब मेरे

मनमोहन मेरे,मनमोहन मेरे
रहमत से तेरी मेरी जिंदगी है,
चरणों मेंअर्पण मेरी बंदगी है,
मनमोहन मेरे-------------।।

तुम्ही शब्द और तुम्ही अर्थ,
हो तुम्ही मेरे परमार्थ,
तुम्ही भाग्य और तुम्ही कर्म,
हो तुम्ही मेरे पुरुषार्थ,
मेरी भक्ति भी तुम्ही हो,
मेरी शक्ति भी तुम्ही,
मनमोहन मेरेे-----------।।

तुम्ही स्नेह हो तुम्ही राग,
हो तुम्ही मेरे अनुराग,
तुम्ही भावऔर तुम्ही प्रेम,
हो तुम्ही भोग और त्याग,
मेरी उपवन भी तुम्ही हो,
और पराग भी तुम्ही,
मनमोहन मेरे-----------।।

तुम्ही सांस हो तुम्ही धड़कन,
हो तुम्ही प्राण आधार,
तुम्ही नयनऔर तुम्ही ज्योति,
हो तुम्ही बिपुल संसार,
मेरी सुबह भी तुम्ही हो,
मेरी सांझ भी तुम्ही,
मनमोहन मेरे------------।।

रचना आभार: ज्योति नारायण पाठक



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