सुनेहा साडा देवीं श्याम नू कागा कालिया

कागा उडदा उडदा जावीं,
सुनेहा साडा देवीं श्याम नू, कागा कालिया ।
साडी बिरथा आख सुनावीं,
सुनेहा साडा देवीं श्याम नू, कागा कालिया ॥

तेरे बिना रुकी साडी ज़िंदगी दी चाल वे,
तेरी याद कित्ता सानु हाल बेहाल वे ।
आवीं आवीं वे कन्हैया मुड़ आवीं,
सुनेहा साडा देवीं श्याम नू, कागा कालिया ॥

आखीं तेरी याद विच्च रोंदे गावां वछे ने,
गोपी ग्वाल रोंदे, रोंदे मांवा बच्चे ने ।
राधा बाँवरी ते तरस तू ख़ावीं,
सुनेहा साडा देवीं श्याम नू, कागा कालिया ॥

मानसी गंगा गिरिराज गोवर्धन,
सूने मधुवन निधिवन वृन्दावन ।
सुक्की यमुना च जल बरसावीं,
सुनेहा साडा देवीं श्याम नू, कागा कालिया ॥

आखदा ‘मधुप’ साडे टूट गए ने साज वे,
ना वज्जे बांसुरी, ना पैंदी किते रास वे ।
रंग बरसीं ते झूले झुलावीं,
सुनेहा साडा देवीं श्याम नू, कागा कालिया ॥
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