कन्हैया दीन दुख के

कन्हैया, दीन दुखियों के, सहायक, तुम कहाते हो,
दुखी हूँ, दीन हूँ मैं भी, मुझे फिर क्यों भुलाते हो,
कन्हैया, दीन दुखियों के, सहायक, तुम कहाते हो

बढ़ाई, सुन के रहमत की, तुम्हारे, ददर पे आया हूँ
रहम की, भीख दो दाता, मैं गर्दिश का, सताया हूँ
हमेशा, आप ही बिगड़ी में आखिर, काम आते हो,
कन्हैया, दीन दुखियों के, सहायक, तुम कहाते हो

इनायत, की नजर करके, बालाएं टाल दो दाता
खुशी मेरी भी, झौली में, जरा सी डाल, दो दाता
जहाँ की, नेमतें तुम तो, गरीबों, पे लुटाते हो,
कन्हैया, दीन दुखियों के, सहायक, तुम कहाते हो

मैं जग से, हार कर आया, तू हारे का सहारा है
तुम्हारे, बिन नहीं जग में, कहीं मेरा, गुजारा है
लगाकर, अपने चरणों में, तरस बेकस पे खाते हो,
कन्हैया, दीन दुखियों के, सहायक, तुम कहाते हो

बड़ी बेदर्द है, दुनियां, भरोसा क्या करूँ इस पर
जहाँ दिल, दे के मैं आया, वहीं से आ रहे पत्थर
गजेसिंह, प्यार का रिश्ता तो बस तुम, ही निभाते हो-ओ

कन्हैया, दीन दुखियों के, सहायक, तुम कहाते हो,
दुखी हूँ, दीन हूँ मैं भी, मुझे फिर क्यों भुलाते हो,
कन्हैया, दीन दुखियों के, सहायक, तुम कहाते हो

भजन गायक- विकास रघुवंशी (दिल्ली)
लेखक- श्री गजे सिंह जी (भिवानी)
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