माँ कर सोल्हा शृंगार मैं उत्सव मनाऊंगी

हाथ में राचणी मेहँदी मैं आज रचाऊ गी,
माँ कर सोल्हा शृंगार मैं उत्सव मनाऊंगी,

घर का कोना कोना मैंने आज सजवाया,
दादी को जो लागे सूंदर वो हार बनवाया,
आजाओ दादी मैया मैं ज्योत जगाउंगी,
माँ कर सोल्हा शृंगार मैं तुझे रिजाऊंगी

मेरी ख़ुशी का माया सागर झलक गया,
बन गई मैं बड़भागान तेरा साथ मिल गया,
जी भर के बधाई बांटो खुशियां लुटाऊ गी,
माँ कर सोल्हा शृंगार मैं तुझे सजाऊंगी,

सब कुछ तुम्ही से दादी है इस संसार में,
जो कुछ भी मैंने पाया सब तेरे प्यार में,
गोपाल तेरे गुण गाये मैं रास रचाऊ गी,
माँ कर सोल्हा शृंगार मैं तुझे रिजाऊंगी
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