सजाये बैठे है मेहफिल

भर नजर देखु तूझे। घनश्याम तब आये मजा,
यार से मिलती रहे बस। प्यार की मीठी सदा,

भजन-- तर्ज--- अगर दिलबर की रुसवाई---

सजाये बैठे है मेहफिल। होरही शाम आजाओ,
तुम्हारी ही कमी है साँवरे। घनश्याम आजाओ,

हजारों कोइसीसे मैने किया तुमको मनाने की,
कभी रोकर कभी गा कर। ब्यथा अपनी सुनाने की,
मगर अबतक हरेक कोसिस हुई नाकाम आजाओ,
तुम्हारी ही कमी है साँवरे---------

हमारे दिल की चाहत को जराभी तुम ना गुनते हो,
बहुत देरी हुई क्यूँकर नही। फरियाद सुनते हो,
अगर रूठे हुए हो तो करु क्या कुछतो बतलाओ,
तुम्हारी ही कमी है साँवरे---------

सभी साथी और संबंधी तेरे स्वागत में आये है,
अकेला मैं नही प्यासा। सभी पलकें बिछाये है,
तड़प सुनलो दिलों की दिल के ओ दिलदार आजाओ,
तुम्हारी ही कमी है साँवरे---------

H K PYASA
हेमकांत झा प्यासा
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