माँ आंबे तुम्हे मैं खत लिखती पर पता मुझे माँलूम नहीं

माँ आंबे तुम्हे मैं खत लिखती पर पता मुझे माँलूम नहीं
दुःख भी लिखती सुख भी लिखती पर पता मुझे मालुम नहीं,
माँ आंबे तुम्हे मैं खत लिखती पर पता मुझे माँलूम नहीं

सूरज से पूछा चंदा से पूछा पूछा टिम टिम तारो से,
इन सब ने कहा अम्बर में है पर पता मुझे मालूम नहीं,

फूलो से पूछा कलियों से पूछा पूछा बाग़ के माली से,
इन सब ने कहा अम्बर में है पर पता मुझे मालुम नहीं ,

नदियों से पूछा लेहरो से पूछा पूछा बेह्ते झरनो से ,
झरनो से कहा सागर में है पर पता मुझे मालुम नहीं,

साधो से पूछा संतो से पूछा पूछा दुनिया के योगो से
इन सब ने कहा है हिरदये में है पर पता मुझे मालुम नहीं,
माँ आंबे तुम्हे मैं खत लिखती पर पता मुझे माँलूम नहीं
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