मैं माटी का खिलोना

मैं माटी का खिलोना,
साईं तुम हो खेलन हार,
मैं कटपुतली हु तेरी,
हर हाल में नाचन हार,
मैं माटी का खिलोना,

मैं मुर्ख और अज्ञानी,
साईं तुम हो पूरण ज्ञानी,
चाहे बीच में मुझे डुबो दो चाहे भव सागर दो तार,
मैं माटी का खिलोना,

ये कैसा खेल रचाया मोह माया में मुझे फसाया,
मैं पापी और दोषी हु साईं तुम हो बक्शन हार ,
मैं माटी का खिलोना,

साईं तुम हो दया के सिन्धु,
नागर छोटा सा इक बिंदु ,
तेरे चरनो से बहती है गंगा यमुना की ये धार ,
मैं माटी का खिलोना,
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