नैन निरंतर मूरत जागे

माँ तेरा दरबार जिसको शोभा जग में न्यारी रे,
नैन निरंतर मूरत जागे सूरत प्यारी रे तू लागे प्यारी रे,

जो  दुख्ररो को लगा मत वाले दर्शन अतियां तरसे रे,
नैनो में करुना बरसे जो मन संतोष से हर ले रे,
अमृत बरसे द्वारे माँ तुम तो दानी रे,
नैन निरंतर मूरत जागे सूरत प्यारी रे तू लागे प्यारी रे,

मातायो पर मुकट मनी को कुंडल काले हल्के रे,
रतन सिंगासन मात विराजे रत ली जे हल चल रे,
गले मोतियाँ की माले डाले बंद हजारी रे तू लागे प्यारी रे,
नैन निरंतर मूरत जागे सूरत प्यारी रे तू लागे प्यारी रे,

इक हाथ माँ कंगन धारे दूजे त्रिशूल धारे रे,
अभय दान देती तू माँ संतोषी हित कारी रे,
चोथे हाथ कटोरा देके दुनिया सारी रे बुलादे प्यारी रे,
नैन निरंतर मूरत जागे सूरत प्यारी रे तू लागे प्यारी रे,
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