तू श्याम शरण में आ जा रे फिर मन चाहा फल पा जा रे

तू श्याम शरण में आ जा रे फिर मन चाहा फल पा जा रे,

लाखो देखे हमने दर पे रो कर आये हस कर जाए,
दो गूंज तू आके बहा जा रे, फिर मन चाहा फल पा जा रे,
तू श्याम शरण में आ जा रे फिर मन चाहा फल पा जा रे,

जिस ने जिस रूप में धाया है.उस रूप में श्याम को पाया है,
तू साँची प्रीत निभा जा रे, फिर मन चाहा फल पा जा रे,
तू श्याम शरण में आ जा रे फिर मन चाहा फल पा जा रे,

लेकर हाथो में मोर छड़ी करते है किरपा दड़ी दड़ी,
इक वार तू श्याम रिजा जा रे  फिर मन चाहा फल पा जा रे,
तू श्याम शरण में आ जा रे फिर मन चाहा फल पा जा रे,

शिवम् की बात को टालो न कृष्णा को अपना बनालो न,
दिल श्याम धनि से लगा जा रे  फिर मन चाहा फल पा जा रे,
तू श्याम शरण में आ जा रे फिर मन चाहा फल पा जा रे,


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