विधना तेरे लेख किसी की समज न आते है

विधना तेरे लेख किसी की समज न आते है,
जन जन के प्रिये राम लखन सिया वन को जाते है,

एक राजा के राज दुलारे वन वन फिरते मारे मारे,
भुनी हो कर रहे कर्म कति डरे नहीं काहू के टारे,
सबके कष्ट मिटाने वाले कष्ट उठा ते है,
जन जन के प्रिये राम लखन सिया वन को जाते है,

पग से बहे लहू की धारा हरी चरणों से गंगा जैसे ,
संकट सहज भाव से सहजे और मुकाते है,
जन जन के प्रिये राम लखन सिया वन को जाते है,
श्रेणी
download bhajan lyrics (786 downloads)