मनड़ो माहरो गबरावे

मनड़ो माहरो गबरावे धरीज भी छूटो जावे,
दीजो सहरो महारा संवारा,
अखडलिया भर भर आवे जद भी तू देर लगावे,
नीले चढ़ आजो माहरा संवारा,

थारी किरपा से बाबा जीवन गुजारा जी,
बिपदा जद आवे कोई थाने पुकारा जी,
थारो मुलक्तो चेहरों आखेया के आगे फेरो ,
धीर बँधावो महारा संवारा,

जग में हसाई माहरी मत न करवा जो जी,
थारा ही टाबरियां हां आके जगा जो जी,
भीगी आखँखडली महारो जो वे बाटडली थारी संग में दिख जो थे माहरा संवारा,
मनड़ो माहरो गबरावे धरीज भी छूटो जावे,

बीती सुनावा थाने अर्जी लगावा जी,
गलती की माफ़ी बाबा थारे से चावा जी,
जितना रुलाओ माहने जितना तरसावो माहने,
टाबर में थारा ही हा संवारा,
मनड़ो माहरो गबरावे धरीज भी छूटो जावे,

थोड़ी गबरावत जी मैं थोड़ो अंधेरो जी,
हारा गा कोणी बाबा इतना तो बेरो जी,
प्रितध्ली थारी महारी पड़ जा सी सब पर भारी,
अंश करे है आशा सनवारा,
मनड़ो माहरो गबरावे धरीज भी छूटो जावे,
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