किसको मैं दर्द कहु मियां

किसको मैं दर्द कहु मियां तेरे जैसा कोई हमदर्द नहीं,
जिस को तू ठीक न कर सकती ऐसा तो कोई मर्ज नहीं,
किसको मैं दर्द कहु मियां तेरे जैसा कोई हमदर्द नहीं,

माँ काली काल के पंजे से बचो को अपने बचाती है,
कभी कोई कष्ट ना जाए रक्शा करती हर दम सब की,
जिस को तू ठीक न कर सकती ऐसा तो कोई मर्ज नहीं,
किसको मैं दर्द कहु मियां तेरे जैसा कोई हमदर्द नहीं,

माँ दुर्गा अपने बचो के हर दम दुखड़े हरती है,
धन दौलत सब कुछ दे कर के झोली भर्ती हो माँ सबकी,
जिस को तू ठीक न कर सकती ऐसा तो कोई मर्ज नहीं,
किसको मैं दर्द कहु मियां तेरे जैसा कोई हमदर्द नहीं,

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