तेरे देने के रस्ते हजार साई

तेरे देने के रस्ते हजार साई ,
किसे देना है कब तेरी मर्जी है सब,
करे चिंता क्यों हम ये बेकार साई,
तेरे देने के रस्ते हजार साई ,

किस रस्ते किस बहाने भर दे किस के खजाने,
तेरे जरा से इशारे कंकर बन जाए तारे,
करे  दिन को रात तेरे लाखो है हाथ,
तेरी शक्ति है अप्रम पार साई,
तेरे देने के रस्ते हजार साई ,

तुम हो दया वां साई करते मुश्किल को आसान,
तेरी है कैसी ये माया कोई समज न पाया,
कैसे डोर तू हिलाये सारे जग को नचाये तेरी मुठी में सारा संसार साई,
तेरे देने के रस्ते हजार साई ,

कोई मर्जी जब भी तुम्हारी राजा हो गया गए भिखारी,
तेरी किरपा जब भी होती पत्थर बन जाए मोती ,
खेले खेल तू निराले करे रात में उजाले,
कैसे पतझड़ में आती बाहर साई,
तेरे देने के रस्ते हजार साई ,
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