रंग डार गयो

रंग डार गयौ, चुनरिया पे मेरी श्याम रंग डार गयौ ...

ग्वाल वाल संग श्याम के, बरसाने कूं जाये,
रंग गुलाल उडात सब, मुरली मधुर बजायें।
रंग लेेेै मार गयौ, चुनरिया पे ....

जो भी पावे गैल में, नैक नंहि शर्मायें,
गलन गुल्चा मार के, संग उठा ले जायें।
नजरिया मार गयौ, चुनरिया पे ......

बरसाने ढूंढन लगे, राधे जी कोेै द्वार,
रंग बसंती उड रह्यौ, ठाड़े बीच बाजार।
चुनरिया फार गयौ, चुनरिया पे ....

ललिता संग राधा खडी, पिचकारी ले हाथ,
बृज में होली श्याम की, देखें भोलेनाथ।
नैना मार गयौ, चुनरिया पे ....।

अवधेश राणा,मथुरा
6395870827
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