तुझे क्यों समझ न आए

दुःख सुख दोनों तन के कपडे किस कारन पहनाए
किस कारन पहनाए
तुझे क्यों समझ न आए, तुझे क्यों समझ न आए
वो चाहे तो प्यासा मारे, चाहे तो प्यास बुझाए
तुझे क्यों समझ न आए, तुझे क्यों समझ न आए

तेरे मन की खातिर पगले तन का बिछा बिछौना
जब तक चाबी भरी प्रभु ने तब तक चले खिलौना
ऐसा नाचे मॉस की पुतली, जैसा नाच नचाए
तुझे क्यों समझ न आए, तुझे क्यों समझ न आए

जल बिन मछली जी नहीं सकती, माँ बिन जिए ना बच्चा
इन्दर उसका पानी भरता जिसका सिदक है सच्चा
वो चाहे तो गागर में भी सागर को छलकाए
तुझे क्यों समझ न आए, तुझे क्यों समझ न आए

बेसमझो को समझ नहीं कब आये कैसी घड़िया
जेठ महीने में लग सकती है सावन की झड़िया
कौन समय आकाश और धरती अपना ब्याह रचए
तुझे क्यों समझ न आए, तुझे क्यों समझ न आए
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