प्राण बंसी में वसे है नन्द किशोर के

राधे दे दे बंसी मेरी कब से करू खुशामत तेरी मैं हाथ जोड़ के,
प्राण बंसी में वसे है नन्द किशोर के,

कान्हा ना दू बंसी तेरी ये तो बनी है सोतन मेरी,
रखी है झ्त्जोर के आज फेंकू गी मैं बंसी तेरी तोड़ के,

तेरे होठ से लग के बंसी मेरो जियो जरावे,
उपर से तू जाकर उपर अपनों हाथ फिरावे,
चलती छुरियां मेरे दिल मे काओ दिल जाऊ गी उल्जन में दुनिया छोड़ के,
फेंकू गी बंसी में तेरी तोड़ की,

छोटी सी बंसी के पीछे मत कर जोहर खाने,
टूट गई तो मर जावे गे बंसी के दीवाने,
चीड़ियाँ चेहके गी न कुल में लाखो दिल टूटे गे पल में कोयल मोर के,
प्राण बंसी में वसे है नन्द किशोर के,

कान्हा तेरी जा बंसी ने जोगन मोहे बनायो,
धुन सुन ने को पल पल भटकू एसो रोग लगायो,
चडके रोज कदम की डाली बंसी मीठी और मतवाली भजावे भोर से,
आज फेंकू गी बंसी तेरी तोड़ के,

आज तलग तो मैंने तुझको समजा नही परायो रंग रूप तेरे दिल में मेरे समायो,
तू है मुझे जान से प्यारी काहे लखा लिखे लिखारी शब्द में जोड़ के ,
प्राण बंसी में वसे है नन्द किशोर के,
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