थारे रे दरबार बाबा चाकर मैं बन जावा जी

थारे रे दरबार बाबा चाकर मैं बन जावा जी,
मैं नित उठ दर्शन पावा जी,
थारे रे दरबार बाबा चाकर मैं बन जावा जी,

ये दावनहार हो है दानी ओ बाबा उमीदा तासु घनी,
ये सेठ हो माहका मैं सेवादार हा एहो साँचा धनि,
थारी दर पर आये महांका दुखड़ा भूल जावा जी,
मैं नित उठ दर्शन पावा जी,
थारे रे दरबार

ये रूह ने जानो कल्याण कर जा रो,
थारा परचा धना,
एह जात ना मानो वेद न जानो गावा गुण थारा,
एहो पालनहार थारी हाज़री भजावा जी,
मैं नित उठ दर्शन पावा जी,
थारे रे दरबार

कोई ुरबाना आवे कोई लूट लूट ने आवे अरजा लगावण ने,
कोई निरधनियाँ आवे कोई निर्बलिया आवे मेहर थारी पावन ने,
मुन्ना शैलजा थारे अर्ज लगावा जी मैं नित उठ दर्शन पावा जी,
थारे रे दरबार
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