सिर मेरा हो दर तेरा और दम निकल जाये

मेरी बस इक खवाइश है चाहे दुनिया बदल जाये,
की सिर मेरा हो दर तेरा और दम निकल जाये,

प्रभु हर रात है हर सुबह तेरी किरपा सी होती है ,
तू जैसे सुखी फसलों पर तेरी वर्षा सी होती है,
जो बढ़ ता हाथ मुझतक वो था पल भर में फिसल जाये,
की सिर मेरा हो दर तेरा और दम निकल जाये,

मैं तुझसे मांगता इतना मेरी हर सांस तेरी हो,
तेरे ही नाम से गुजारे ये अर्जी ख़ास मेरी हो,
ये नज़रे तेरी उठ जाये तो साया दुःख का टल जाये,
की सिर मेरा हो दर तेरा और दम निकल जाये,

पकड़ ले हाथ ओ कान्हा बहुत ही उदास हु प्यारे,
मैं कलम से लिख कर देता हु तेरा ही दास हु प्यारे,
हो दिल पे गरूर चढ़ता आकाश पे इक पल में जल जाये,
की सिर मेरा हो दर तेरा और दम निकल जाये,
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