तम्बू में ही रहे अब मेरे राम जी

तम्बू में ही रहे अब मेरे राम जी,
ये तो हम हिन्दूयो  को गवारा नहीं,
आखिर क्यों हो रहा है उसी पे सितम जिसने घर तो किसी का उजाड़ा नहीं,
तम्बू में ही रहे अब मेरे राम जी,

ये ज़मीन रो रही आसमा रो रहा,
प्रभु को देख सारा जहां रो रहा,
हम तो उसके लिए जान लुटाते रहे,
हो सका जो कभी भी हमारा नहीं,
तम्बू में ही रहे अब मेरे राम जी,

वेद गोपाल हद से गुजर जायेगे,
या तो मंदिर बने गा या मर जायेगे,
भाई कुलदीप मतलब की दुनिया है ये,
अब किसी को किसी का सहारा नहीं,
तम्बू में ही रहे अब मेरे राम जी,
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