बेचैन है दिल कुछ भी सुजाइ नहीं देता

बेचैन है दिल कुछ भी सुजाइ नहीं देता,
साई के सिवा कोई दिखाई नहीं देता,

दुःख सुख का गेहवान तुझे मान चुके है,
दुनिया है फकत वैद ये हम जान चुके है,
इस कैद से फिर तू क्यों रिहाई  ही देता,
बेचैन है दिल कुछ भी सुजाइ नहीं देता,

हम पास तेरे आये है मजबूर है कितने,
आता है नजर हम को पर दूर है कितने,
अपना अपनों को कभी जुदाई नहीं देता,
बेचैन है दिल कुछ भी सुजाइ नहीं देता,

ईश रथ में रहा जो वो यहाँ का न वह का,
उस आदमी का जीना भी जीना है कहा का,
पैगाम साई जिसको सुनाई नहीं देता,
बेचैन है दिल कुछ भी सुजाइ नहीं देता,
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