तेरे दर न कोई दरबार

चले पवन भी खुश्बूधार ठंडी छाओ है तेरे दवार,
तेरे दर न कोई दरबार आके झुकता है सारा संसार,
झुकता है सारा संसार तेरे दर सा न कोई द्वार,

तेरे द्वार सुहे रंग उठे मन में रंग,
संतो भक्तो के संग नाचे मस्त मलंग,
हो रही चारो दिशाओ जय जय कार,
तेरे दर न कोई दरबार आके झुकता है सारा संसार,
झुकता है सारा संसार तेरे दर सा  न कोई द्वार,

योगी भोगी दरवेश पाये ज्ञान उपदेश तुम्हे पूजते गणेश ब्रह्मा विष्णु महेश,
वेद रचना पुराण युग चार,
तेरे दर न कोई दरबार आके झुकता है सारा संसार,
झुकता है सारा संसार तेरे दर न कोई द्वार,

मैया कल और आज मेरे मन पे तेरा राज,
तू सवारे सब के काज राखे भक्तो की लाज,
सिर जीवन फिरोज आये द्वार,
तेरे दर न कोई दरबार आके झुकता है सारा संसार,
झुकता है सारा संसार तेरे दर न कोई द्वार,
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