साई के जैसा न दुनिया में कोई

साई के जैसा न दुनिया में कोई,
साई नाम इक साँचा जपले तू साई,

तेरे दिल की साई जाने,
सच को पगले तू न माने,
सोच ले प्राणी सारी उमेरियाँ व्यर्थ में तूने गवाई,
साई के जैसा न दुनिया में कोई,

आ शिरडी में शीश झुका ले,
जो तू चाहे वो ही पा ले सांसो की माला से जपले,
बंदे साई साई साई,
साई के जैसा न दुनिया में कोई,

आजा अब तो ना कर देरी,
क्यों करता है तेरी मेरी,
सब का मालिक इक है बंदे
कर ले नेक कमाई,
साई के जैसा न दुनिया में कोई,
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